पितृ और कुलदेवी पूजन साथ होने के कारण वंश संबंधी बाधाएँ शांत होने लगती हैं। घर में अनावश्यक कलह कम होती है, अचानक होने वाले नुकसान रुकते हैं, और बिना कारण बनने वाली मानसिक बेचैनी घटती है। जिन लोगों को रात में डर, दबाव, बुरे सपने या किसी उपस्थिति का अनुभव होता है, उनमें धीरे-धीरे शांति आने लगती है और नींद स्थिर हो जाती है।
साधक के भीतर एक प्रकार की चेतना जागृत होने लगती है। वह लोगों के स्वभाव को पहले से समझने लगता है, कौन हितैषी है और कौन हानि पहुँचाने वाला — इसका अनुमान स्वतः होने लगता है। कई बार शत्रु या धोखा देने वाले व्यक्ति पहले ही पहचान में आने लगते हैं और बड़ी हानि टल जाती है।
आर्थिक रूप से भी इसका अप्रत्यक्ष लाभ माना जाता है। अचानक सही अवसर मिलना, रुका हुआ धन वापस मिलना, या नया कार्य शुरू करने की प्रेरणा मिलना — ऐसे अनुभव सामान्य रूप से बताए जाते हैं। यह धन देने वाली साधना नहीं मानी जाती, बल्कि सही दिशा दिखाने वाली साधना मानी जाती है जिससे आय के मार्ग खुलते हैं।