नाम का अर्थ: "मिश्रकेशी" का अर्थ है विविध प्रकार से सुशोभित अथवा अलौकिक रूप से सजे हुए केशों वाली।
स्वरूप: दिव्य सौंदर्य, संगीत, नृत्य और कोमल कलात्मक ऊर्जा का प्रतीक।
निवास: देवलोक, विशेषकर इन्द्रलोक।
अधिष्ठान: ललित कलाएँ, सौंदर्यबोध, आकर्षक व्यक्तित्व और रचनात्मक प्रेरणा।
यदि साधना के उद्देश्य की बात करें, तो परंपरागत मान्यताओं के अनुसार इस साधना का मुख्य लक्ष्य मिश्रकेशी की कृपा प्राप्त करना, व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ाना, आत्मविश्वास विकसित करना, सकारात्मक आभामंडल का निर्माण करना तथा जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करना बताया गया है।