इसके स्मरण मात्र से साधक शीघ्र ही राजा के समान हो जाता है। कवच का पाठ-कर्त्ता पाँच हजार वर्षों तक भूमि पर जीवित रहता है, और अवश्य ही वेदों तथा अन्य सभी शास्त्रों का ज्ञाता हो जाता है। अरण्य (वन, जंगल) में इस महा-कवच का पाठ करने से सिद्धि मिलती है। कुल-विद्या यक्षिणी स्वयं आकर अणिमा, लघिमा, प्राप्