
पौराणिक आख्यानों में कामधेनु का वर्णन एक ऐसी दिव्य और चमत्कारी गौमाता के रूप में मिलता है, जिनमें अलौकिक शक्तियाँ विद्यमान थीं। मान्यता थी कि उनके दर्शन और आशीर्वाद से मनुष्य के दुःख दूर होते थे तथा उनके आश्रय में रहने वाले व्यक्ति को अन्न, पोषण और आवश्यक संसाधनों की कमी नहीं होती थी।
कामधेनु का दूध अमृततुल्य माना जाता था। वे सबका पालन-पोषण करने वाली माता और धर्मसम्मत इच्छाओं को पूर्ण करने वाली देवी थीं। उनका स्वरूप केवल भौतिक समृद्धि तक सीमित नहीं था। वे यज्ञ, धर्म, कृषि, पोषण और समस्त जीवन-व्यवस्था की दिव्य आधारशक्ति मानी जाती थीं।